चतुरंग, त्रिवट और स्वर मालिका की परिभाषा

 प्रश्न - चतुरंग, त्रिवट और स्वर मालिका किसे कहते हैं? परिभाषा दीजिये|




चतुरंग    -   स्वयं नाम से यह स्पष्ट है कि इनमें 4 वस्तुओं का मिश्रण है |ख्याल के शब्द अर्थात साहित्य, तराना, पखावज अथवा तबला के बोल तथा सरगम इसमे मिले रहते हैं| यह ख्याल के सामान ही गया जाता हैं. 




त्रिवट    -    इसमें तीन चीजों का मिश्रण है इसलिए इसे त्रिवट कहा गया है. इसमें कविता, तराना तथा पखावज के बोल होते हैं. 



स्वर मालिका    -     राग मे प्रयोग किये जाने बाले स्वरों की तालबध्य रचना स्वर मलिका कहलाती हैं. यह प्रत्तेक राग मे हो सलती हैं और मध्य लय मे गयी जाती हैं. इसका उदेश्य प्रारंभिक विद्यार्थियों को स्वर और राग ज्ञान करना हैं. इसको सरगम अर्थात सुरावर्त भी कहते हैं |


आईये राग भूपाली के स्वर मालिका के उदाहरण से समझते हैं. 



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