सप्तक क्या है और ये कितने प्रकार का होता है ?

 सप्तक क्या है और ये कितने प्रकार का होता है ?




saptak kya hai aur ye kitne prakar ka hota ?

सप्तक


सप्तक के प्रकार -

सात शुद्ध स्वरों के समूह को सप्तक कहते हैं। इन सात स्वरों के नाम हैं, सा रेे ग म प ध नि। हर सप्तक में सा के बाद रे, ग म प ध नि स्वर होते हैं। नि के बाद पुनः सां आता है और  यही से दूसरा सप्तक भी शुरू होता है।

Indian classical music  में संगीत कारो व शास्त्रकारों ने 3 सप्तकों का वर्णन किया है 


1. मन्द्र सप्तक  ♭♭
2. मध्य सप्तक  ♭♭
3. तार सप्तक  ♭♭


मध्य सप्तक -

 जिस सप्तक में हम साधारणतः गाते बजाते हैं मध्य सप्तक कहलाता हैं, 
इस सप्तक के स्वरों का उपयोग अन्य सप्तकों की उपेक्षा ज्यादा होता हैं,  यह सप्तक दोनों सप्तकों के मध्य में होता हैं इसी लिए इसे मध्य सप्तक कहा जाता हैं, इसमें 7 शुद्ध और 5 विकृत कुल 12 स्वर होते हैं 

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मन्द्र सप्तक - 

 मध्य सप्तक के पहले वाले सप्तक मन्द्र सप्तक कहलाता हैं, 
यह सप्तक मध्य सप्तक से आधा अर्थात मन्द्र सप्तक के प्रत्येक स्वर की आंदोलन सख्या मध्य सप्तक के उसी स्वर के आंदोलन की आधी होती हैं, 
उदाहरणर्थ - 
अगर मध्य सप्तक के " प " का आंदोलन 360 हैं तो मन्द्र सप्तक के " प "  का आंदोलन मध्य सप्तक का आधा 180 होगा |


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मन्द्र सप्तक में भी कुल 12 स्वर होते हैं 7 शुद्ध और 5 विकृत 





तार सप्तक -


मध्य सप्तक के बाद या आगे वाला सप्तक ताल सप्तक कहलाता हैं, 
यह सप्तक मध्य सप्तक का दोगुना ऊंचा होता हैं,  
दूसरे शब्दो में तार सप्तक के प्रत्येक स्वर मध्य सप्तक से उसी स्वर के दोगुने होते हैं, 
जैसे -- मध्य सप्तक के "प" का आंदोलन 360 हैं तो ताल सप्तक के "प " का आंदोलन 720 होगा 

इस सप्तक में भी 12 स्वर होते हैं 



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