Raag asavari details d

 हम राग यमन और राग भूपाली सीख चुके हैं |

आईये आज हम राग आसावरी के बारे में जानते है |

राग आसावरी = 



यह राग आसावरी थाट से उत्पन्न मना                                गया हैं | 
आसावरी राग में  ग ध व नि स्वर कोमल लगते हैं. 
वादी ध और सम्वादी ग माना गया है |
आरोह में ग  एवं नि का प्रयोग वर्जित हैं तथा अवरोह   में सातों स्वरों का प्रयोग होता हैं |
 इसकी जाति औडव - सम्पूर्ण हैं | 
गायन समय दिन का दूसरा प्रहार हैं 

आरोह -   सा रे ग[ko] म  प ध[ko] नि[ko]सां 

अवरोह  - सां नि[ko] ध[ko] प म प ध[ko] म प ग[ko] ~ रे सा |

पकड़ -    म प ध[ko] म प ग[ko] रे सा |


वंदिस 

राग आसावरी  -  तीनताल (मध्यलय )

स्थायी -



अंतरा 




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