भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं चित्रपट संगीत में निबंध

हम आज शास्त्रीय संगीत और चित्रपट संगीत पर निबंध लिखते हैं | दोनों की तुलना भी करेंगे, 



 "शास्त्रीय संगीत 🎤और चित्रपट संगीत🎧 पर निबंध"

     


शास्त्रीय 🎵संगरेट हम उसे कह सकते हैं, जिसके कुछ नियम होते हैं और उन नियमो का पालन करना जरुरी होता है|

इसी प्रकार चित्रपट संगीत हम उसे कहते हैं  जिस संगीत का उपयोग फिल्मो🎬 के लिए किया जाता हैं, 


चित्रपट संगीत का मुख्य उद्देश्य यह हैं की सुनने बाले के कानो को मधुर लगे एवं शीघ्र प्रभाव पड़े, 🎸


इसमें स्वर राग ताल शब्द में कोई बंधन नहीं होता |
इसमें अधिकतर दादरा कहरवा और तीन तालो का प्रयोग किया जाता हैं एवं कुछ फिल्मी गीत अन्य तालो मे पाए जाते हैं |🎻

शास्त्रीय संगीत में नियमों का पालन अनिवार्य होता है स्वर लय तालबध्य होना राग के अनुकूल स्वरों को लगाना गाते बजाने का क्रम होना अलाप तान बोलतन सरगम आदि की तैयारी और सफाई के साथ उच्चारण करना आदि शास्त्रीय संगीत के मुख्य नियम है|🎶
इन्हे मानते हुये आनंद की सृष्टि करना हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का उद्देश्य है | 🔊




अधिकांश लोगो के साथ यह होता हैं की उन्हें संगीत के इन नियमो को सिखने में इतना वक़्त लग जाता हैं कि उनके उद्देश्य (रंजकता) तक की नौबत नहीं आती |🎧

दूसरी ओर चित्रपट संगीत में कोई बंधन नहीं होता और रंजकता मधुरता मात्र एक उद्देश्य होता हैं 

सबसे मुख्य बात शास्त्रीय संगीत की तारीफ या प्रसंशा करने के लिए थोड़ी बहुत संगीत का ज्ञान होना आवश्यक हैं, 
किन्तु चित्रपट अथवा भाव संगीत की प्रशंसा के लिए संगीत के ज्ञान की आवश्यक नहीं होती | 🎹

इसलिए साधारण जनता चित्रपट संगीत को सुनना अधिक पंसद करती हैं, 


चित्रपट संगीत लय प्रधान संगीत हैं इसलिए दादरा और केहरबा का अधिक प्रयोग किया जाता हैं,  

दूसरी ओर शास्त्रीय संगीत में लय की तुलना में स्वर प्रधान होता है,  अतः शास्त्रीय संगीत की प्रशंसा वही व्यक्ति कर सकता हैं, जिसे संगीत की थोड़ी बहुत समझ हो, 


अतः शास्त्रीय संगीत के प्रचार के लिए यहाँ आवश्यक हैं की जनता को थोड़ी बहुत संगीत की शिक्षा दी जाय  |


आधुनिक युग में चित्रपट संगीत हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की अपेक्षा काफी अधिक सुना जाता हैं,






संगीत से सम्बंधित अगर आपका कोई सवाल या सुझाव हैं तो कृपया comment box में बताये 


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