Raag durga parichay aur vandis | राग दुर्गा परिचय एवं वंदिस

पिछले post में हम राग यमन राग आसावरी और राग बिहाग के बारे में पड़ चुके हैं |


 हम आज राग दुर्गा के बारे में पड़ेंगे |



राग दुर्गा -



परिचय -

              ये राग बिलावल थाट से माना गया है | इसमें ग और नि वर्जित हैं | इसकी जाति औडव - औडव हैं | वादी ध और सम्वादी रे है | इसे रात्रि के द्वितीय प्रहर में गाया बजाया जाता हैं |



इस राग में कई मतभेद हैं, कुछ संगीतकार म को वादी और सा को सम्वादी मानते हैं 





आरोह -  सा रे ग म प ध सां |

अवरोह -  सां ध प म रे सा |

पकड़  -  ध,  म रे प, म प ध म ~ रे,  सा रे •ध सा |







आईये अब हम इसके वंदिस को जानते है |




राग दुर्गा  -  तीनताल ( मध्यलय)



स्थायी -




रे  प  प  ध | म  प  ध  प | ध  ~  म  प | म  रे  सा  सा|

दे ~  वि  दु | ~   र्गे  ~  द | या  ~ नि  द| या  ~  क  रो |

O             | 3               | X             | 2




रे ध सा रे | म प ध सां | धसां रेंसां  ध म | प म रे सा

ज ग ज न|नि ज न की| बे ~  ~ ~ गि व्य |था ~ ह रो

O           | 3             | ×                     | 2





अंतरा -



ध म प ध | सां सां ~ सां | सां ~ सां सां | सां रें सां सां

व र दा  ~ | ~   नि ~  भ | वा ~ नि   दु  | ख  ह  र  नि

0            | 3                | X                | 2




रें  मं  रें  सां | ध  सां  ध  म | रे  म  प  ध | म  रे  सा  सा

दा ~ नि  म | हा   ~  नि  रा | ~ म  रं  ग  | आ ~ यो  शा

O              | 3                 | X             | 2









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